बादशाह और फकीर
पुराने ज़माने की बात हैं एक बादशाह था.वह बडा ही नेक और दयालु था,उदार भी था.जो कोई फकीर उसके द्वार पर पहुचता खाली हाथ नही लौटता था.
एक दिन की बात है,एक फकीर उसके दरवाजे पर पंहुचा.जिसके कपडे साफ थे किन्तु फटे हुए थे.उसने पहरेदारों से कहा-’बादशाह से कह दो उनका भाई मिलने आया है.”
बादशाह के कोई भाई नही था,यह बात पहरेदारों को मालूम थी.पहरेदार समझ गये की यह पागल है और उसपे हँसने लगे,किन्तु फकीर अपनी बात पर डटा रहा.उसके हाव-भाव तथा बातचीत में पागलपन का कोई चिन्ह प्रकट नही होता था.
पहरेदार बादशाह के पास गया.उसने बताया की हुजूर एक फकीर आया है, जो अपने आप को आपका भाई बता रहा है.बादशाह कुछ देर तो चुप रहे फिर उन्होने मुस्कराकर कहा-”उसे बुला लाओ.”
फकीर जब बादशाह के पास पंहुचा तो बादशाह ने उसका बडा सम्मान किया और फिर उससे पूछा-”कहिए,भाई साहब आपने यह आने का कष्ट कैसे किया?”फकीर ने जवाब दिया,भैया,इस समय मैं बड़ी मुसीबत में हूँ.जिस महल में रहता हूँ वह पुराना होने के कारण गिरने वाला है. मेरे पहले बत्तीस नौकर थे वह अब छोड़ के चले गये है.उसके अलावा जो मेरी पांच रानिया थी वे भी निर्बल होने के कारण मेरी सेवा ठीक तौर से नही कर सकती.मैं आपके पास इस लिए आया हूँ कि मेरी कुछ सहायता कीजिए.